Header Ads

क़सस अल अन्बिया: हज़रत दानयाल علیہ السلام - क़िस्त नं. 2 | Daniel - Prophet Danyal |

बनी इसराईल की पाकदामन औ़रत और दरबार-ए शाही में हज़रत दानयाल का फ़ैसला

क़सस अल अन्बिया: हज़रत दानयाल عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ -

शुरू ख़ुदावन्द-ए मतआ़ल के बा-बरकत नाम से जो बातिन ओ ज़ाहिर से ख़ूब वाक़िफ़ है -

दुरूद-ए ख़ुदावन्द बर तमाम मुअ़ज़्ज़िज़ क़ारईन. अज़ जानिब-ए मरदम-ए निज़ाम-ए आ़लम आप मुअ़ज़्ज़िज़ीन को अज़ तह क़ल्ब अस्सलामु अ़लैकुम व ख़ुश आमदीद. मैं आप का मेज़बान, ज़ुलक़रनैन मुहम्मद सुलैमान और आप इस वक़्त मौजूद है, निज़ाम-ए आ़लम पर. क़ब्ल अज़ मुतालआ़ एक दफ़ा तिलावत-ए दुरूद बर ख़ातिम-ए अन्बिया ﷺ पेश करें कि ख़ुदावन्द-ए सुब्हान क़ारी पर 10 मर्तबा अपनी रहमतों का नुज़ूल फ़रमाता है -

بِسْمِ ٱللَّٰهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَـٰٓئِكَتَهُ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ صَلُّواْ عَلَيْهِ وَسَلِّمُواْ تَسْلِيمًا

दुरूद व सलाम बर नबी-ए ख़ुदावन्द-ए मतआ़ल, जनाब-ए दानयाल عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ‎ -

(आया आप ने ये सीरीज़ ख़्वान्दन फ़रमाईं -)

ख़ुलासा -

क़ारईन-ए गरामी गुज़िश्ता क़िस्त-ए अव्वल में आप अ़ज़ीज़ान को हज़रत दानयाल के बचपन से मुतअ़्ल्लिक़ हवादिस से आशना कराया गया था लिहाज़ा आज आप मुअ़ज़्ज़िज़ीन को उस से आगे के हालात ओ वाक़ेआ़त से वाक़िफ़ कराया जायगा. 

हज़रत दानयाल علیہ السلام - क़िस्त नं. 2

जैसा कि क़ारईन-ए गरामी जानते हैं नबु ख़ज़नस्र के यरूशलम पर हमले के दौरान लाखों यहूदी मारे गए और बाक़ियों को ग़ुलामी में ले लिया गया उन में अल्लाह के नबी हज़रत दानयाल علیہ السلام अभी नौजवान थे इस जंग ओ जद्ल के दौरान कई यहूदियों ने भागकर हिजाज़ और मुल्क-ए शाम के अतराफ़ अ़लाक़ों में पनाह ली. नबु ख़ज़ नस्र के दौर में बतौर ग़ुलाम लाये गए यहूदी दोबारा अ़र्ज़-ए क़ुद्स नहीं लौट सके. हज़ूर-ए अकरम मुहम्मद सल्लल्लाहु अ़लैहि व आलिहि व सल्लम के दौर-ए मुबारका के दौरान ख़ैबर या मदीनतुल मुनव्वरा के गिर्द रहने वाले जिन यहूदियों का तज़्करा हमें क़ुरआन ओ सुन्नत से मिलता है ये वोही भगोड़े थे.

हमले के दौरान बतौर-ए ग़ुलाम बाबुल लाये गए मुन्तख़िब बच्चों को तरबियत के लिए दरबारियों में तक़सीम कर दिया गया. लिहाज़ा हर एक के हिस्से में 4 बच्चे आये. नबु ख़ज़नस्र ने अपने मुशीर से कहा कि तुम मेरे लिए भी 4 मुन्तख़िब नौजवान तलाश लाओ. बशर्ते की वो ख़ूबसूरत, ज़हीन ओ तअ़्लीम याफ़्ता हों, उन्हें क़स्र में ज़िन्दगी गुज़ारने के तौर तरीक़े और उमरा से पेश आने के आदाब सिखाओ. ताअ़्मील-ए अहकाम करते हुए मुशीर नबु ख़ज़ नस्र के मतलूबा बच्चे ढूंढ लाया. और शाह-ए बाबुल के हुज़ूर पेश किये. 

इन चारों बच्चों में हज़रत दानयाल علیہ السلام सबसे ज़्यादा ख़ूबरू, ज़हीनतरीन और किसी भी उस्ताद की ज़रूरत से बेनियाज़ थे जैसा कि अल्लाह पाक अपने हर नबी को अपने दौर का सबसे हसीन और इल्म ओ हिकमत वाला बनाता है लिहाज़ा अब आप علیہ السلام और आप علیہ السلام के दीगर हमराहान हननिया मिशाईल और अज़रिया की तरबियत क़स्र-ए शाही में होने लगी. एक दफ़ा आप علیہ السلام को खाने में शराब और हराम खाना पेश किया गया आप علیہ السلام ने फ़रमाया अल्लाह की पनाह मेरी नज़रों से इस खाने को दूर कर दें कि ये बन्दगान-ए ख़ुदावन्द पर हराम है.

लिहाज़ा आप علیہ السلام के हमराहन ने भी ये खाना नहीं खाया. ख़ानसामा ने अर्ज़ किया कि अगर आप علیہ السلام ये नहीं खाएंगे तो आप علیہ السلام का जिस्म तवाना और मज़बूत नहीं हो सकेगा और बादशाह को पता चला तो वो मुझे अपने ओहदे से बर तरफ़ भी कर देगा. आप علیہ السلام ने फ़रमाया 10 रोज़ तक हमें हलाल खाना पेश करें और बाक़ियों को यही खाना दें और 10 रोज़ बाअ़्द आप हम में और उन में फ़र्क़ जान सकेंगे 10 रोज़ बाअ़्द आप के जिस्म की तवानाई मज़बूती और ज़हानत दीगर बच्चों के मुक़ाबले कहीं गुना ज़्यादा थी.

लिहाज़ा नबु ख़ज़ नस्र ने आप علیہ السلام और आप के तीनों असहाब को अपने दरबार में आअ़्ला तरीन ओहदों पर फ़ाइज़ कर दिया एक रोज़ नबु ख़ज़ नस्र के साथ वोही वाक़ेआ़ पेश आया जो ताजदार-ए हुस्न सय्यदना हज़रत यूसुफ़-ए सिद्दीक़ علیہ السلام के वक़्त अ़ज़ीज़-ए मिस्र क़ित्तीन के साथ हुआ था. उस ने ख़्वाब देखा और भूल गया लिहाज़ा उस ने अपने तमाम ज़ाती मुअ़ब्बरान को तलब किया और उन से अपना ख़्वाब और तअ़्बीर-ए ख़्वाब तलब की. मुअ़ब्बरान कहने लगे कि आप ने ख़्वाब में क्या देखा? ये हम भला कैसे बता सकते हैं?

हाँ लेकिन अगर आप अपना ख़्वाब हम से बयान करते तो यक़ीनन हम तअ़्बीर-ए ख़्वाब पेश करते. नबु ख़ज़ नस्र ने उन से कहा कि अगर तुम ने मेरा ख़्वाब और तअ़्बीर-ए ख़्वाब मुझ से बयान ना किया तो मैं तुम्हें क़त्ल कर दूंगा. अपनी तमाम तर जुहूद के बाद भी बड़े बड़े मुअ़ब्बरान नबु ख़ज़ नस्र के ख़्वाब की तअ़्बीर पेश करने में नाकाम हुए लिहज़ा उन्हें इस की क़ीमत अपनी जान देकर चुकाना पड़ी. अगले रोज़ ग़ुस्से में आकर बडशाह ने तमाम आ़क़िलीन को भी क़त्ल करने का हुक्म दे दिया. उन में हज़रत दानयाल علیہ السلام भी शामिल थे.

लिहाज़ा जब क़त्ल करने के लिए सिपाही पहुंचे तो आप علیہ السلام ने उन से पूछा कि आख़िर इस की वजह क्या है? सिपाही ने जवाब दिया कि गुज़िश्ता शब् बदशाह ने एक ख़्वाब देखा था और वो भूल गया. मुअ़ब्बरान उस के ख़्वाब की तअ़्बीर पेश करने में नाकाम हुए लिहाज़ा उस ने सब को क़त्ल कर दिया और अब हमें आप सब के क़त्ल का हुक्म दिया है. सिपाही की बात सुनकर आप علیہ السلام ने बारगाह-ए इलाही में अपने हाथ बुलंद कर दिए. फ़ौरन ख़ुदावन्द ने वहीय के ज़रिये आप علیہ السلام पर ख़्वाब और तअ़्बीर-ए ख़्वाब को वाज़ेह कर दिया.

इस के बाद आप علیہ السلام नबु ख़ज़ नस्र के हुज़ूर पेश हुए और आप علیہ السلام ने कहा कि बेशक मेरे रब से इस कायनात की कोई भी चीज़ राज़ नहीं वो हर शय पर क़ुदरत रखता है और अपने मोअ़्मिन बन्दों पर अपने राज़ अफ़्शां करता है. ये कह कर आप علیہ السلام ने नबु ख़ज़ नस्र की तअ़्बीर-ए ख़्वाब बयान की आप علیہ السلام ने फ़रमाया ऐ बादशाह आप क़ब्ल अज़ ख़्वाब अपने मुस्तक़बिल के बारे में सोच रहे थे और इसी हालत में आप को आंख लग गयी. आप ने ख़्वाब में एक अ़ज़ीम ओ शान और रौशन मुजस्मा देखा. उस की बाफ़्त यक्ता ओ बेमिस्ल थी.

उस का सर और चेहरा सोने से बना था. उस का सीना और दोनों बाज़ू चांदी से बने थे. उस का शिकम और रानें ताम्बे से बनीं थीं. उस की टांगें लोहे से बनीं थीं. उस के पैरों की अंगलियां लोहे और ख़ाक के मुरक्कब से बनीं थीं. आप उस पर नज़रें दौड़ा ही रहे थे कि उस के पैरों पर एक पत्थर गिरा और वो मुजस्मा रेज़ाँ रेज़ाँ हो गया. हत्ता कि उसका एक सुराग़ तक ना बचा और देखते ही देखते जो पत्थर उस के पैरों पर गिरा था उस ने एक अ़ज़ीम ओ शान पहाड़ की शक़्ल इख़्तियार कर ली. 

फिर आप علیہ السلام ने उस के ख़्वाब की तअ़्बीर बयान करते हुए फ़रमाया कि मुजस्मा जो तुम ने अपने ख़्वाब में देखा वो तुम्हारी मुमलिकत की तमसील है और मुजस्मे में सोना चांदी वगैरह तुम्हारी मुमलिकत के मुख़्तलिफ़ अद्वार हैं और तुम्हारी हुकूमत की ताक़त की तमसील है. मुजस्मे का सर तुम और तुम्हारी हुकूमत है. ख़ालिक़-ए कुल-ए मख़्लूक़ात व मौजूदात ने तुम्हे और तुम्हारी हुकूमत को इस तरह रौशन किया है जैसे मुख़्तलिफ़ धातों में सोना चमकता है. मुजस्मे का चांदी से बना सीना और बाज़ू ये बताता है -

तुम्हारे बाद भी ये हुकूमत इसी तरह क़ायम ओ दायम रहेगी. हां मगर बस कुछ तब्दीलियां होंगी. मुजस्मे का शिकम और रानें ताम्बे की थी जो ये बताती हैं कि ये हुकूमत अ़ज़ीम ओ शान होगी मगर इस में खुशहाली ऐसी नहीं रहेगी. उसकी टांगें लोहे की थीं जो इस बात की निशानदेही करती हैं कि तुम्हारी हुकूमत ऐसे ही मज़बूत होगी मगर इस की शान ओ शौक़त हमेशा ऐसी ना रहेगी. उस के पैरों की अंगलियां लोहे और ख़ाक के मुरक्कब से बनीं थीं जो इस बात की तरफ़ इशारा करती है कि मुस्तक़बिल में तुम्हारी हुकूमत दूसरों की मोहताज हो जायगी.

फिर उस के पैरों पर एक पत्थर गिरता है और वो मुजस्मा रेज़ाँ रेज़ाँ हो जाता है जो बिलआख़िर तुम्हारी इस अ़ज़ीम ओ शान हुकूमत के ख़ात्मे की निशानदेही करती है. आख़िर में जो पत्थर अचानक एक अ़ज़ीम ओ शान पहाड़ की शक़्ल इख़्तियार कर लेता है वो ये बताता है कि इसी तरह कई हुकूमतें अ़रूज से ज़वाल देखेंगी मगर अस्ल हुकूमत जो हमेशा से थी और हमेशा क़ायम रहने वाली है, बेशक वो मेरे ख़ालिक़-ए कायनात की हुकूमत है जिस ने इस कायनात को पैदा किया.

नबु ख़ज़ नस्र ने आप علیہ السلام को गले से लगा लिया और अपने पास बिठाया और अल्लाह पाक की तअ़रीफ़ में चंद जुम्ले कहे उस ने कहा कि यक़ीनन वो तमाम जहानों का रब है. नबु ख़ज़ नस्र ने आप علیہ السلام को सारे बाबुल का फ़रमान दार मुक़र्रर कर दिया. नबु ख़ज़ नस्र अपने तमाम उमूर में आप علیہ السلام ही से मश्वरा लेने लगा और यूं आप علیہ السلام उसके मुशीर-ए ख़ास हो गए. 

फ़िल-वक़्त आज की माअ़लूमात का हम यहीं इख़्तेताम करते हैं. सिलसिला-ए क़सस अल अन्बिया में हज़रत दानयाल علیہ السلام के हवादिस-ए ज़िन्दगी से मुतअ़्ल्लिक़ क़िस्त-ए सोम की अशाअ़त अज़ जानिब मरदम-ए निज़ाम-ए आ़लम आज से 6 रोज़ बाअ़्द (तारीख़ - 13/Dec/2022 की शब 20:00 बजे) होगी. 

Post a Comment

0 Comments