क़सस अल अन्बिया: हज़रत यूनुस عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ -
शुरू ख़ुदावन्द-ए मतआ़ल के बा-बरकत नाम से जो बातिन ओ ज़ाहिर से ख़ूब वाक़िफ़ है -
दुरूद-ए ख़ुदावन्द बर तमाम मुअ़ज़्ज़िज़ क़ारईन. अज़ जानिब-ए मरदम-ए निज़ाम-ए आ़लम आप मुअ़ज़्ज़िज़ीन को अज़ तह क़ल्ब अस्सलामु अ़लैकुम व ख़ुश आमदीद. मैं आप का मेज़बान, ज़ुलक़रनैन मुहम्मद सुलैमान और आप इस वक़्त मौजूद है, निज़ाम-ए आ़लम पर. क़ब्ल अज़ मुतालआ़ एक दफ़ा तिलावत-ए दुरूद बर ख़ातिम-ए अन्बिया ﷺ पेश करें कि ख़ुदावन्द-ए सुब्हान क़ारी पर 10 मर्तबा अपनी रहमतों का नुज़ूल फ़रमाता है -
بِسْمِ ٱللَّٰهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَـٰٓئِكَتَهُ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ صَلُّواْ عَلَيْهِ وَسَلِّمُواْ تَسْلِيمًا
दुरूद व सलाम बर नबी-ए ख़ुदावन्द-ए मतआ़ल, जनाब-ए यूनुस नबी عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ -
मोहतरम मुअ़ज़्ज़िज़ क़ारईन, सिलसिला-ए क़सस अल अन्बिया عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ में गुज़िश्ता क़िस्त हज़रत सुलैमान عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ की ज़िन्दगी पर मुस्तक़िर थी व आज सिलसिला-ए क़सस अल अन्बिया عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ ही में हमारा मौज़ू पयाम्बर-ए ख़ुदावन्द-ए मतआ़ल عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ जनाब-ए यूनुस عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ की ज़िन्दगी के हालात और हवादिस पर मुस्तक़िर है -
(आया आप ने ये सीरीज़ ख़्वान्दन फ़रमाईं -)
हज़रत यूनुस علیہ السلام इब्न मता अल्लाह के नबी और रसूल थे. आप علیہ السلام का ज़माना 784-860 क़ब्ल अज़ मसीह है. आप आल-ए हज़रत इसराईल علیہ السلام से हैं. आप निहायत ही हसीन और जमील थे. ख़ुदावन्द ने आप علیہ السلام को 28 साला उम्र मुबारक में इल्म ओ हिकमत से नवाज़ा और इसी उम्र में आप علیہ السلام ने ऐलान-ए रिसालत किया. आप علیہ السلام को शहर नैनवा की क़ौम का रसूल मुन्तख़ब किया गया. नैनवा बय्न अल नहरैन-ए अ़लया का दौर-ए जदीद के शुमाली अ़राक़ में मूसल के मुज़ाफ़ात में वाक़अ़् एक क़दीम आशूरी शहर था.
हज़रत यूनुस علیہ السلام की क़ौम भी गुज़िश्ता दीगर अक़्वाम के मिस्ल शिर्क ओ बिदअ़त में ग़र्क़ थी और एक ख़ुदा-ए यक्ता से ग़ाफ़िल होकर बुतपरस्ती में मुब्तिला थी. आप علیہ السلام ने फ़राइज़-ए नबुव्वत ओ रिसालत को बख़ूबी अन्जाम दिया. आप علیہ السلام अपनी क़ौम से क़ब्ल गुज़िश्ता अक़्वाम की ना फ़रमानी के बाअ़्द उन के तर्सनाक अन्जाम का मुसलसल तज़्करा अपनी क़ौम के जुलू करके बारहां उन की तौज़ीह करते रहे और उन्हें राह-ए हक़ पर लाने के लिए हर कोशिश की. आप علیہ السلام ने अपनी क़ौम से फ़रमाया कि बेशक तुम ख़ुद पर बड़ा ज़ुल्म कर रहे हो.
ख़ुदावन्द के नज़दीक शिर्क ओ बुतपरस्ती से अ़ज़ीम कोई गुनाह नहीं. बिलआख़िर हज़रत यूनुस علیہ السلام ने अपनी क़ौम से फ़रमाया कि अगर तुम मुझ पर ईमान ना लाये और इसी तरह शिर्क ओ बुतपरस्ती में मुब्तिला रहे तो ज़रफ़-ए 40 रोज़ तुम पर अज़ जानिब-ए ख़ुदावन्द अ़ज़ाब नाज़िल होगा जैसा कि तुम से क़ब्ल गुज़िश्ता अक़्वाम पर नाज़िल हुआ. हज़रत यूनुस علیہ السلام अपनी क़ौम की इन्तबाह करके बग़ैर अल्लाह तआ़ला से इजाज़त लिए अ़लाक़ा-ए नैनवा से अपनी हमसर और अपने दो बच्चों के हमराह कहीं दूर निकल गए.
हज़रत यूनुस علیہ السلام के अपने अ़लाक़े से दूर चले जाने के क़रीब 35 रोज़ बाअ़्द अ़लाक़ा-ए नैनवा में अचानक आसमान पर सुह्ब-ए स्याह छाने लगे और उन से ऐसा धुंआ निकलना शुरू हुआ, जिस से हर एक शख़्स किसी दूसरे शख़्स को देख नहीं पाता था. क़ौम-ए यूनुस علیہ السلام ने जब इन आसार-ए अ़ज़ाब-ए इलाही को देखा तो फ़ौरन बारगाह-ए इलाही में तौबा करना शुरू कर दिया और अपने ख़ालिक़-ए हक़ीक़ी की वहदत की शहादत दी और उस के पयाम्बर علیہ السلام पर ईमान ले आये. बुतपरस्ती से तौबा की हर ज़ालिम ने मज़लूम से मआ़फ़ी तलब की.
हर मुग़ताब ने ग़ीबत से, हासिद ने हसद से और मग़रूर ने ग़ुरूर से, चोर ने चोरी से और यूं हर गुनाहगार ने अपने हर गुनाह से तौबा की लिहाज़ा ज़रफ़-ए 3 रोज़ ये धुंआ और काले बादल दूर हो गए. क़ौम-ए यूनुस علیہ السلام में 1 लाख से ज़ाइद लोग थे वो सब ईमान ले आये मगर हज़रत यूनुस علیہ السلام अपनी क़ौम के दरम्यान अ़दम मौजूद थे. आप علیہ السلام अपने दो बच्चों और हमसर के हमराह दरया के पास आये. आप علیہ السلام ने उन्हें वहीं छोड़ दिया और अपने एक बच्चे के हमराह दरया पार कर गए मगर जब लौटे दो देखा कि आप علیہ السلام की हमसर और एक बच्चे को भेड़ियों ने खा लिया.
जो बच्चा आप علیہ السلام के हमराह था वो भी दरया में ग़र्क़ हो गया लिहाज़ा आप علیہ السلام एक कश्ती में सवार गए कश्ती के मल्लाह ने आप علیہ السلام से अर्ज़ किया कि हम बड़े तजुर्बाकार मल्लाह हैं और हमारी कश्ती बहरी तूफ़ान में तभी फंसती है कि जब हमारे हमराह कोई शख़्स अपने मालिक से बग़ावत करके आया हो. आप علیہ السلام ने मल्लाह से कहा कि वो ग़ुलाम में ही हूँ जो अपने मालिक से बग़ैर इजाज़त लिए भाग आया हूँ. कश्ती के मल्लाह ने पूछा ये कैसे मुमकिन है कि आप علیہ السلام एक ग़ुलाम हैं. यहां ग़ुलाम से मुराद बंदा-ए ख़ुदा है.
हज़रत यूनुस علیہ السلام ने फ़रमाया कि मैंने अपनी क़ौम पर ग़ुस्सा किया. मुझे हुक्म-ए इलाही का इंतज़ार करना चाहिए था. मैंने अपने रब से बग़ावत की है लिहाज़ा तुम मुझे दरया में फेंक दो. मल्लाह ने कहा कि हरगिज़ नहीं, आप علیہ السلام के चेहरे की नूरानियत से वाज़ेह है कि आप علیہ السلام हर ख़ता से पाक हैं, आप मअ़्सूम हैं. कश्ती में मौजूद किसी दीगर मल्लाह ने कहा कि क्यों ना हम बज़ात-ए ख़ुद अल्लाह ही से पूछ लें? लिहाज़ा उन्होंने क़रआ़ अंदाज़ी की शर्त ये रखी कि जिस के नाम से क़रआ़ निकलेगा उसे को दरया में फेंका जायगा.
इस तरह तीन औक़ात क़रआ़ अंदाज़ी की गयी और तीनों ही बार हज़रत यूनुस علیہ السلام का नाम आया मगर फिर भी मल्लाह ने आप علیہ السلام को दरया में फेंक देने से इन्कार कर दिया लिहाज़ा बज़ात-ए ख़ुद आप علیہ السلام ने ये कहकर कि जब भागे हुए ग़ुलाम की सरज़निश दरया में फेंक कर की जाती है तो कहीं ऐसा ना हो कि मेरी वजह से आप علیہ السلام भी अ़ज़ाब-ए इलाही की गिरफ़्त में आएं, दरया में छलांग लगा दी तो ख़ुदावन्द-ए महरबान ने मछली को हुक्म फ़रमाया कि तुम यूनुस علیہ السلام को निगल जाओ मगर ख़बरदार कि यूनुस علیہ السلام तुम्हारी ग़िज़ा नहीं, मेरी अमानत है.
फिर अल्लाह तआ़ला ने फ़रिश्ते से फ़रमाया जाओ और दरया में ऐलान कर दो कि कोई नर मछली इस मछली के क़रीब ना आये और कोई भी मछली इस मछली के हमराह ना तैरे क्यों कि इस मछली के पेट में अल्लाह का नबी मौजूद है. इस हवाले से हुज्जतुल इस्लाम हज़रत इमाम ग़ज़ाली अ़लैहिर्रहमां लिखते हैं कि जिस मछली के पेट में जनाब-ए यूनस علیہ السلام ने 40 रोज़ गुज़ारे हैं वो बरोज़-ए क़यामत जन्नत में दाख़िल की जायगी. बहरहाल हज़रत यूनस علیہ السلام मछली के पेट में भी अल्लाह तआ़ला से दुआ़गोह रहे.
आप علیہ السلام मुसलसल 40 रोज़ तक لاَّ إِلَـهَ إِلاَّ أَنتَ سُبْحَـنَكَ إِنِّى كُنتُ مِنَ الظَّـلِمِينَ का विर्द करते रहे. 40 रोज़ बाअ़्द मछली ने हज़रत यूनस علیہ السلام को अपने पेट से दरया के साहिल पर आकर निगल दिया. आप علیہ السلام का जिस्म सुफ़ैद हो गया था. चमड़ी नवज़ाद बच्चे की चमड़ी के मानिंद नर्म ओ नाज़ुक हो गयी थी. आप علیہ السلام के जिस्म और सर के सारे बाल झड़ गए थे. जिस्म बिल्कुल कमज़ोर हो गया था. हत्ता कि आप علیہ السلام खड़े हो पाने की हालत में भी नहीं रहे. लिहाज़ा ख़ुदावन्द-ए महरबान ने धूप से आप علیہ السلام की हिफ़ाज़त के लिए आप علیہ السلام के क़रीब कद्दू की बेल पैदा फ़रमाई.
और उसे दरख़्त की तरह बुलंद कर दिया और एक जंगली बकरी के दूध को आप علیہ السلام की ग़िज़ा मुक़र्रर कर दिया. हर रोज़ वो बकरी अपने मुक़र्ररा वक़्त पर आती और आप علیہ السلام जो आप उस से अपनी ग़िज़ा तनावल फ़रमाते. चंद रोज़ बाअ़्द आप علیہ السلام का जिस्म दोबारा जवां ओ तवाना हो गया. सर के बाल दोबारा उगने शुरू हो गए. फि आप علیہ السلام उठ खड़े हुए और किनारे से थोड़ा आगे चलकर गए तो देखा कि जिस हाल में आप علیہ السلام ने अपने हमसर और बच्चों को आख़िरी वक़्त देखा था उसी हाल में वो आप का इंतज़ार कर रहे हैं.
गोया कि अभी एक लहज़े क़ब्ल आप علیہ السلام अपने अहले ख़ाना से जुदा हुए थे और अब दोबारा आ मिले हैं. बहरहाल, अब आप علیہ السلام अपने अहले ख़ाना के हमराह अपनी क़ौम की जानिब लौटे तो पाया कि माज़ी में बुतपरस्त रह चुकी क़ौम-ए यूनुस علیہ السلام अब ख़ालिक़-ए हक़ीक़ी से आशना हो चुकी है. इबादत-ए इलाही में मशग़ूल है. गुनाहों से तौबा कर ली है. आप علیہ السلام अपनी क़ौम को इस हालत में देखकर निहायत ही ख़ुश हुए और आप علیہ السلام ने बारगाह-ए इलाही में मुतशकर हुए.
फ़िल-वक़्त आज की माअ़लूमात का हम यहीं इख़्तेताम करते हैं. सिलसिला-ए क़सस अल अन्बिया में हज़रत यूनस علیہ السلام के हवादिस-ए ज़िन्दगी से मुतअ़्ल्लिक़ ये अव्वल ओ आख़िरी क़िस्त है. लिहाज़ा क़िस्त-ए क़ादिम, हज़रत ज़ुलकिफ़्ल علیہ السلام की ज़िन्दगी पर मुस्तक़िर होगी जिस की अशाअ़त अज़ जानिब मरदम-ए निज़ाम-ए आलम आज से 6 रोज़ बाअ़्द (तारीख़ - 19/November/2022 की शब 20:00 बजे) होगी.

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