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क़सस अल अन्बिया: हज़रत ज़ुलकिफ़्ल علیہ السلام | Zulkifl - Prophet Dhu Al-Kifl |

हज़रत ज़ुलकिफ़्ल को गौतम बुद्ध से मन्सूब करना

क़सस अल अन्बिया: हज़रत ज़ुलकिफ़्ल عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ -

शुरू ख़ुदावन्द-ए मतआ़ल के बा-बरकत नाम से जो बातिन ओ ज़ाहिर से ख़ूब वाक़िफ़ है -

दुरूद-ए ख़ुदावन्द बर तमाम मुअ़ज़्ज़िज़ क़ारईन. अज़ जानिब-ए मरदम-ए निज़ाम-ए आ़लम आप मुअ़ज़्ज़िज़ीन को अज़ तह क़ल्ब अस्सलामु अ़लैकुम व ख़ुश आमदीद. मैं आप का मेज़बान, ज़ुलक़रनैन मुहम्मद सुलैमान और आप इस वक़्त मौजूद है, निज़ाम-ए आ़लम पर. क़ब्ल अज़ मुतालआ़ एक दफ़ा तिलावत-ए दुरूद बर ख़ातिम-ए अन्बिया ﷺ पेश करें कि ख़ुदावन्द-ए सुब्हान क़ारी पर 10 मर्तबा अपनी रहमतों का नुज़ूल फ़रमाता है -

بِسْمِ ٱللَّٰهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَـٰٓئِكَتَهُ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ صَلُّواْ عَلَيْهِ وَسَلِّمُواْ تَسْلِيمًا

दुरूद व सलाम बर अन्बिया-ए ख़ुदावन्द-ए मतआ़ल, जनाब-ए अय्यूब व जनाब-ए ज़ुलकिफ़्ल عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ‎ -

मोहतरम मुअ़ज़्ज़िज़ क़ारईन, सिलसिला-ए क़सस अल अन्बिया عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ में गुज़िश्ता क़िस्त हज़रत यूनुस عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ की ज़िन्दगी पर मुस्तक़िर थी व आज सिलसिला-ए क़सस अल अन्बिया عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ ही में हमारा मौज़ू पयाम्बर-ए ख़ुदावन्द-ए मतआ़ल عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ जनाब-ए ज़ुलकिफ़्ल عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ की ज़िन्दगी के हालात और हवादिस पर मुस्तक़िर है - 

(आया आप ने ये सीरीज़ ख़्वान्दन फ़रमाईं -)

आप अलैहिस्सलातु वस्सलाम का नाम बशर या शर्फ़ है। ख़ुदावंद-ए मतआल ने आप अलैहिस्सलाम को आप के वालिद-ए मोहतरम के बाद नबुव्वत से नवाज़ा और हुक्म दिया कि आप अलैहिस्सलाम भी अपने वालिद-ए मोहतरम की तरह अपने आबा ओ अजदाद अय्यूब علیہ السلام यूसुफ़ علیہ السلام व याक़ूब علیہ السلام ओ इस्माईल علیہ السلام व इस्हाक़ علیہ السلام ओ इब्राहीम-ए ख़लीलुल्लाह علیہ السلام के दीन की तब्लीग़ करें. 

आप علیہ السلام हमेशा अपने वालिद, हज़रत अय्यूब علیہ السلام की तरह यतीमों, मोहताजों, ग़रीबों और बेवा औरतों पर रहम फ़रमाते, उनकी ज़रूरीरियात का ख़्याल रखते, मोहताजों की कफ़ालत की वजह से ही आपका नाम ज़ुलकिफ़्ल हुआ यानी किफ़ालत करने वाले. अलबत्ता आप علیہ السلام के लक़ब ज़ुलकिफ़्ल علیہ السلام हो जाने के पीछे कई वुजूहात बताई जातीं हैं. आप علیہ السلام के फ़रज़न्द अब्दान علیہ السلام हुए.

आप علیہ السلام ने उनको वसीयत की थी कि मेरी वफ़ात के बाद भी अपने अजदाद के दीन पर क़ायम रहना और अपनी क़ौम की भी माअबूद-ए हक़ीक़ी की जानिब रहनुमाई मुसलसल जारी रखना. आप علیہ السلام ता-उम्र, मुल्क-ए शाम के शहर-ए क़नआन में रहे. मुल्क-ए शाम कितने ही अनबिया ओ मुरसलीन की सरज़मीन और जा-ए पैदाइश रहा है. आप अलैहिस्सलातु वस्सलाम 75 बरस की उम्र में इस दार-ए फ़ानी से कूच कर गए.

हज़रत ज़ुलकिफ़्ल علیہ السلام की हयात-ए मुबारका पर अज़ जानिब-ए मरदम-ए निज़ाम-ए आलम बक़ब्ल-ए आज भी एक मज़मून शाया किया गया था, जिसमे ये बताया गया है कि हज़रत ज़ुलकिफ़्ल علیہ السلام की शनाख़्त बुद्ध मज़हब के बानी गौतम बुद्ध से की जाती है, ये बात दुरूस्त है मगर बाद में मज़ीद तहक़ीक़ात करने के बाद मरदम-ए निज़ाम-ए आलम ने पाया कि ये ग़लत है. 

क्यूँ कर गौतम बुद्ध की पैदाइश तो 563 क़ब्ल-ए मसीह में हुई थी जबकि हज़रत ज़ुलकिफ़्ल علیہ السلام का ज़माना बुद्ध की पैदाइश से 1000 साल और हज़रत ईसा علیہ السلام से 1563 सालों क़ब्ल ही गुज़र चुका था लिहाज़ा हज़रत ज़ुलकिफ़्ल علیہ السلام को गौतम बुद्ध से मन्सूब कर देना बिलकुल भी दुरूस्त ना होगा. 

फ़िल-वक़्त आज की माअ़लूमात का हम यहीं इख़्तेताम करते हैं. सिलसिला-ए क़सस अल अन्बिया में हज़रत ज़ुलकिफ़्ल علیہ السلام के हवादिस-ए ज़िन्दगी से मुतअ़्ल्लिक़ ये अव्वल ओ आख़िरी क़िस्त है. लिहाज़ा क़िस्त-ए क़ादिम, हज़रत उज़ैर علیہ السلام की ज़िन्दगी पर मुस्तक़िर होगी जिस की अशाअ़त अज़ जानिब मरदम-ए निज़ाम-ए आलम आज से 6 रोज़ बाअ़्द (तारीख़ - 25/November/2022 की शब 20:00 बजे) होगी.  

मुतवज्जह - गौतम बुद्ध और हज़रत ज़ुलकिफ़्ल علیہ السلام से मुताल्लिक़ मज़मून पढ़ने के लिए दर्ज ज़ैल लिंक पर क्लिक करें -

Gautama Buddha & Hz. Zulkifl Alayhissalam -

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