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क़सस अल अन्बिया: हज़रत उज़ैर علیہ السلام | Ezra - Prophet Uzayr |

हज़रत उज़ैर अलैहिस्सलाम की ज़िन्दगी

क़सस अल अन्बिया: हज़रत उज़ैर عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ -

शुरू ख़ुदावन्द-ए मतआ़ल के बा-बरकत नाम से जो बातिन ओ ज़ाहिर से ख़ूब वाक़िफ़ है -

दुरूद-ए ख़ुदावन्द बर तमाम मुअ़ज़्ज़िज़ क़ारईन. अज़ जानिब-ए मरदम-ए निज़ाम-ए आ़लम आप मुअ़ज़्ज़िज़ीन को अज़ तह क़ल्ब अस्सलामु अ़लैकुम व ख़ुश आमदीद. मैं आप का मेज़बान, ज़ुलक़रनैन मुहम्मद सुलैमान और आप इस वक़्त मौजूद है, निज़ाम-ए आ़लम पर. क़ब्ल अज़ मुतालआ़ एक दफ़ा तिलावत-ए दुरूद बर ख़ातिम-ए अन्बिया ﷺ पेश करें कि ख़ुदावन्द-ए सुब्हान क़ारी पर 10 मर्तबा अपनी रहमतों का नुज़ूल फ़रमाता है -

بِسْمِ ٱللَّٰهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَـٰٓئِكَتَهُ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ صَلُّواْ عَلَيْهِ وَسَلِّمُواْ تَسْلِيمًا

दुरूद व सलाम बर नबी-ए ख़ुदावन्द-ए मतआ़ल, जनाब-ए उज़ैर नबी عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ‎ -

मोहतरम मुअ़ज़्ज़िज़ क़ारईन, सिलसिला-ए क़सस अल अन्बिया عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ में गुज़िश्ता क़िस्त हज़रत यूनुस عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ की ज़िन्दगी पर मुस्तक़िर थी व आज सिलसिला-ए क़सस अल अन्बिया عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ ही में हमारा मौज़ू पयाम्बर-ए ख़ुदावन्द-ए मतआ़ल عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ जनाब-ए उज़ैर عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ की ज़िन्दगी के हालात और हवादिस पर मुस्तक़िर है - 

(आया आप ने ये सीरीज़ ख़्वान्दन फ़रमाईं -)

हज़रत उज़ैर इब्न शरख़िया ख़ुदावन्द-ए करीम के मक़बूल बन्दे और बरगुज़ीदा अन्बिया में से एक हैं. आप का ज़िक्र और तआ़रुफ़ कलाम-ए इलाही में सूरह बक़रह में मौजूद है. आप बनी इसराईल के पयाम्बर हैं. आप तौरात के हाफ़िज़ हैं. बनी इसराईल आप को ख़ुदा का फ़रज़न्द कहते थे. ख़ुदावन्द-ए करीम ने इन पर जितने एहसानात और इनायात किये ये उतने ही सरकश और ना फ़रमान होते गए. हत्ता कि ख़ुदावन्द ने अपनी नाराज़गी का इज़हार करते हुए इन पर शाह-ए बाबुल नबुख़ज़नस्र-ए सानी की शक़्ल में अपना अ़ज़ाब मुसल्लत फ़रमाया.

ये क़ौम-ए अमालका का हाकिम था. अज़ क़ब्ल मल्कियत नबुख़ज़ नस्र फ़रमानदार-ए बाबुल था मगर बाअ़्द में इसे ओहदा-ए मल्कियत हासिल हुआ. 597 क़ब्ल अज़ मसीह में इस ने अ़र्ज़-ए क़ुद्स पर हमला करके वहाँ निहायत ही क़त्ल ओ ग़ारतगिरी बरपा की और पूरा शहर बर्बाद कर दिया. 1 लाख से ज़ाइद यहूदियों को क़त्ल कर दिया गया. इस ने किताब-ए तौरात को भी आग लगा दी. हत्ता कि उस का कोई भी अस्ल हिस्सा बाक़ी ना बचा. और बाक़ी यहूदियों को उस ने अपना ग़ुलाम बना लिया. इन क़ैदियों में से एक हज़रत उज़ैर भी थे.

मगर किसी तरह करके आप क़ैद-ए नबुख़ज़नस्र से फ़रार होने में कामयाब हुए और सीधा अ़र्ज़-ए क़ुद्स रवाना हुए. आप अपने शहर की तबाही का मंज़र देखकर गहरे सदमे में डूब गए. वहाँ एक शख़्स भी मौजूद नहीं था. वहाँ चंद दरख़्तान पर फल लदे थे. आप ने अंगूरों को लिया और उन का रस निचोड़कर अपने मुश्क में भर लिया. आप ने अपने गधे को दरख़्त से बाँधा और सो गए इसी हालत में आप की रूह क़ब्ज़ कर ली गयी. इस वक़्त आप की उम्र मुबारक 40 साला थी. ख़ुदावन्द ने आप को कुल-ए मौजूदात ओ मख़्लूक़ात से पोशीदा कर दिया.

इस तरह आप का जिस्म मुबारक महफ़ूज़ रहा. इस तरह 70 सालों तक आप के जिस्म मुबारक को हर शय से पोशीदा रखा गया. एक रोज़ मुल्क-ए फ़ारिस का बादशाह अपने लश्कर के हमराह इस ग़ैर मुअ़्ताद शहर-ए क़ुद्स से गुज़रा. उस ने इस शहर की वीरानगी को देखकर यहां उसने अपनी क़ौम को आबाद होने का हुक्म दिया. यूं इधर उधर बिखरे पड़े यहूदियों ने फिर से अपने शहर-ए क़ुद्स में आबाद होना शुरू कर दिया. इस तरह ये ग़ैर मुअ़्ताद शहर दोबारा आबाद और शादतर अज़ क़ब्ल हो गया.

30 साला मज़ीद अर्सा गुज़र जाने के बाअ़्द ख़ुदावन्द-ए सुब्हान ने आप को दोबारा ज़िंदा फ़रमाया. आप ने देखा कि आप का गधा मर चुका था और. उस की हड्डियां बिखरी पड़ीं थीं मगर दरख़्त से आप ने जो फल तोड़े थे और अंगूरों का रास निचोड़ा था और बिल्कुल ताज़ा था. आप के सर और दाढ़ी के बाल मुबारक अभी भी स्याह थे. यानी 100 साला अर्सा गुज़र जाने के बावजूद अभी तक आप की उम्र मुबारक 40 साला थी. और आप उसी हालत में मौजूद थे जिस में आप आज से 100 सालों क़ब्ल मौजूद थे. 

इसी हाल में ख़ुदावन्द ने आप से वहीय के ज़रिये कलाम किया और सवाल किया कि ऐ उज़ैर आप कब से दर हालत-ए ख़्वाब हैं. आप ने फ़रमाया कि मैं दौरान-ए वक़्त-ए फ़ज़्र सोया था और अब अ़स्र बेदार हो गया हूँ. ख़ुदावन्द-ए मतआ़ल ने फ़रमाया नहीं ऐ उज़ैर आप गुज़िश्ता 100 सालों से हालत-ए ख़्वाब में हैं और आप को मौत देकर 100 सालों बाअ़्द आज दोबारा ज़िंदा किया गया है ताकि आप अपने रब की शानों का बज़ात-ए ख़ुद मुशाहदा करें. आप ये जान लें कि कैसे बरोज़-ए आख़िर आप का रब हर मुर्दा शख़्स को दोबारा बा-हयात करेगा?

आप अपने गधे की जानिब नज़र फ़रमाएं जिस की फ़क़त हड्डियां बाक़ी रह गयीं हैं. अगरचे फार और अंगूरों का रास बिल्कुल ताज़ा है, ऐ उज़ैर! आप देखें कि हम कैसे इस गधे को हयात-ए नौ अ़ता करते हैं. अचानक गधे की बिखरी हुई हड्डियों में हरकत पैदा हुई और वो आपस में जुड़ने लगीं और गधे के जिस्म का क़ाब बना फिर इन हड्डियों पर गोश्त चढ़ आया और गधा दोबारा ज़िंदा हो गया. ख़ुदावन्द-ए अ़ज़ीम की इस शान को देखकर बे इख़्तियार आप पुकार उठे कि बेशक, ऐ मेरे अ़ज़ीम रब! तेरी शानें लाजवाब है.

फिर अपने गधे पर सवार होकर आप शहर-ए क़ुद्स में दाख़िल हुए. हत्ता कि आप उस मक़ाम पर पहुंचे, जहां 100 सालों पहले आप का घर हुआ करता था. वहाँ एक नाबीना और नातवानी जिस्मी ज़ईफ़ा बैठी थी. उस ने अपने बचपन में आप को देखा था. आप ने उस से सवाल तलब फ़रमाया कि क्या ये घर उज़ैर नबी का है? ज़ईफ़ा ने कहा, हाँ, मगर तुम उन का हाल क्यों तलब करते हो? उज़ैर गुज़िश्ता 100 सालों से गुम गश्ता हैं. ये कहकर ज़ईफ़ा की आँखें भर आईं और वो रोने लगी. लिहाज़ा आप ने उस से फ़रमाया कि मैं ही उज़ैर हूँ.

ज़ईफ़ा ने अर्ज़ किया कि आप उज़ैर कैसे हो सकते हैं? आप ने फ़रमाया कि मुझे ख़ुदावन्द ने 100 सालों तक मौत दी और दोबारा ज़िंदा फ़रमाया और आज में अपने घर लौट आया हूँ. ज़ईफ़ा ने आप से अर्ज़ किया कि आप उज़ैर कैसे हो सकते हैं? वो ख़ुदावन्द के बड़े मक़बूल बंदे थे और ख़ुदावन्द उन की हर दुआ क़ुबूल फ़रमायां करता था. अगर वाक़ई आप उज़ैर नबी हैं तो मेरे लिए दुआ़ फ़रमाएं कि हक़ तआ़ला मुझे मेरी बिनाई दोबारा अ़ता फ़रमाए. लिहाज़ा आप ने इस ज़ईफ़ा के हक़ में बारगाह-ए इलाही में अपने दस्त-ए मुबारक बुलंद फ़रमाए. 

ख़ुदावन्द ने आप की दुआ़ मुस्तजाब फ़रमाई और उस कमज़ोर ओ नातवां ज़ईफ़ा को दोबारा बीनाई मिल गयी. और उसकी कमज़ोरी भी दूर हो गयी. लिहाज़ा जब उस ने आप को देखा तो फ़ौरन पहचान लिया. उसने कहा कि मैं शहादत देती हूँ कि बेशक आप अल्लाह के नबी हज़रत उज़ैर हैं. ये ज़ईफ़ा आप को बनी इसराईल के मुहल्ले में ले गयी. इत्तफ़ाक़न वहाँ तमाम यहूदी मौजूद थे. हत्ता कि वहाँ हज़रत उज़ैर के अहले ख़ाना भी मौजूद थे. 

आप का फ़रज़न्द और अहफ़ाद जो कि अब बूढ़े हो चुके थे, मौजूद थे. ज़ईफ़ा ने मज्लिस-ए यहूद में जाकर ऐलान किया कि ऐ लोगों! बेशक ये अल्लाह के नबी हज़रत उज़ैर हैं. मगर किसी ने उस ज़ईफ़ा की बात पर यक़ीन नहीं किया. मजलिस से आप के फ़रज़न्द उठ खड़े हुए और कहा कि मेरे वालिद-ए गिरामी के कान्धों के दरम्यान एक स्याह ज़गील था, जिसकी शक़्ल क़मर जैसी थी. लिहाज़ा हज़रत उज़ैर ने अपने कांधों के दरम्यान मौजूद ज़गील दिखाया मगर फिर भी उन्होंने कहा कि उज़ैर नबी किताब-ए तौरात के हाफ़िज़ थे. 

आया आप हमारे रूबरू आयात-ए तौरात की तिलावत करेंगे कि हमें आप के उज़ैर नबी होने का यक़ीन हो जाये. लिहाज़ा आपने तिलावत-ए आयात-ए तौरात का आग़ाज़ किया मगर अब उन्होंने कहा कि हमें नहीं लगता कि आप ने सहीह तौर पर आयात-ए तौरात की तिलावत की हैं क्यों कि नबु ख़ज़नस्र की क़त्ल ओ ग़ारतगरी के दौरान किताब-ए तौरात को जला दिया गया और अब तौरात-ए मुक़द्दस की कोई एक जिल्द भी बाक़ी नहीं बची पाई है कि हम आप की तिलावत-ए आयात-ए तौरात की तस्दीक़ कर सकते.

इसी दौरान एक शख़्स उठा और उसने कहा कि नबु ख़ज़नस्र के हमले के दौरान मेरे दादा ने तौरात की एक जिल्द को अंगूरों की बेल की जड़ में दफ़्न कर दिया गया था. अगर आप उस जगह की निशान देही कर दें तो उसे तलाश करके आप की आयात-ए तौरात की तस्दीक़ की जा सकती है. लिहाज़ा आप ने उस मक़ाम की निशानदेही की और वहाँ से तौरात की जिल्द बरामद की गयी. लिहाज़ा आप ने दोबारा तौरात की तिलावत पेश की और उन्होंने पाया कि जो भी आयात आप ने पेश कीं वो सब मुकम्मल तौर पर सहीह थीं.

लिहाज़ा मज्लिस में मौजूद तमाम यहूद बे इख़्तियार पुकार उठे कि बेशक आप ही उज़ैर नबी हैं और आप अल्लाह के फ़रज़न्द हैं, नऊज़ुबिल्लाह. उस दौर से आज तक बनी इसराईल का यही अ़क़ीदा है कि हज़रत उज़ैर अल्लाह के फ़रज़न्द हैं, नऊज़ुबिल्लाही मिन ज़ालिक.
   
फ़िल-वक़्त आज की माअ़लूमात का हम यहीं इख़्तेताम करते हैं. सिलसिला-ए क़सस अल अन्बिया में हज़रत उज़ैर علیہ السلام के हवादिस-ए ज़िन्दगी से मुतअ़्ल्लिक़, अव्वल ओ आख़िरी क़िस्त है लिहाज़ा क़िस्त-ए क़ादिम, हज़रत दान्याल علیہ السلام की ज़िन्दगी पर मुस्तअ़्मिल होगी जिस की अशाअ़त अज़ जानिब मरदम-ए निज़ाम-ए आलम आज से 6 रोज़ बाअ़्द (तारीख़ - 1/December/2022 की शब 20:00 बजे) होगी.

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