क़सस अल अन्बिया: ह़ज़रत इदरीस عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ -
शुरू ख़ुदावन्द-ए मतआ़ल के बा-बरकत नाम से जो बातिन ओ ज़ाहिर से ख़ूब वाक़िफ़ है -
दुरूद-ए ख़ुदावन्द बर तमाम मुअ़ज़्ज़िज़ क़ारईन, अज़ जानिब-ए मरदम-ए निज़ाम-ए आ़लम आप मुअ़ज़्ज़िज़ीन को अज़ तह क़ल्ब अस्सलामु अ़लैकुम व ख़ुश आमदीद. मैं आप का मेज़बान, ज़ुलक़रनैन मुहम्मद सुलैमान और आप इस वक़्त मौजूद है, निज़ाम-ए आ़लम पर. क़ब्ल अज़ मुतालआ़ एक दफ़ा तिलावत-ए दुरूद बर ख़ातिम-ए अन्बिया ﷺ पेश करें कि ख़ुदावन्द-ए सुब्हान क़ारी पर 10 मर्तबा अपनी रहमतों का नुज़ूल फ़रमाता है -
بِسْمِ ٱللَّٰهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَـٰٓئِكَتَهُ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ صَلُّواْ عَلَيْهِ وَسَلِّمُواْ تَسْلِيمًا
दुरूद व सलाम बर नबी-ए ख़ुदावन्द-ए मतआ़ल, जनाब-ए इदरीस عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ -
मोहतरम मुअ़ज़्ज़िज़ क़ारईन, सिलसिला-ए क़सस अल अन्बिया عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ में गुज़िश्ता क़िस्त हज़रत आदम عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ की ज़िन्दगी पर मुस्तक़िर थी व आज सिलसिला-ए क़सस अल अन्बिया عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ ही में हमारा मौज़ू पयाम्बर-ए ख़ुदावन्द-ए मतआ़ल عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ जनाब-ए इदरीस عَلَيْهِ ٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَامُ की ज़िन्दगी के हालात और हवादिस पर मुस्तअ़्मिल है -
(आया आप ने ये सीरीज़ ख़्वान्दन फ़रमाईं -)
हज़रत मूसा अ़लैहिस्सलाम
हज़रत यूसुफ़ अ़लैहिस्सलाम
हज़रत इदरीस का इस्म-ए वाक़ई अख़्नूख़ है. मगर चूंका आप अपनी उम्मत में मुसलसल कसरत से पयाम-ए तौहीद सुनाते थे. लिहाज़ा आप को बाद में इदरीस कहा जाने लगा. और यक़ीनन आप भी हज़रत इदरीस को आज तक इन के इस्म-ए वाक़ई से ही जानते होंगे. आप का शजराह-ए नसब, इदरीस इब्न यारिद इब्न महलाबिल इब्न क़ैनान इब्न अनूश इब्न शीस इब्न आदम अ़लैहिस्सलातु वस्सलाम है. हज़रत इदरीस अल्लाह के पहले रसूल हैं. अल्लाह ने आप पर 30 सहाइफ़ नाज़िल फ़रमाये.
अव्वलीन इल्म-ए नुजूम को दुनया के सामने लाने वाले आप ही हैं. चूंका आप अल्लाह के रसूल हैं, लिहाज़ा ये अल्लाह ने आप को बतौर-ए मोअ़जज़ा सिखाया था. अव्वलीन आप ही ने क़लम को ईजाद किया. और आप ही ने लोगों को क़लम का इस्तअ़माल करना सिखाया. लिहाज़ा इस में कोई शक नहीं कि हर जदीद इख़्तराआ़त की बुनियाद अन्बिया-ए इलाही या इस्लाम ने अ़ता की है. मगर कुफ़्फ़ार ने उन्हें अपने सर बांध लिया है. मसलन तवलीद-ए बर्क़ की अ़लामात हज़रत अ़ली अल मुरतज़ा ने अ़ता फ़रमाये.
अम्वाज-ए सदा (आवाज़ की लहरें) हवा के दोश पर सफ़र करती हैं. ये तसव्वुर भी हज़रत उमर इब्न ख़त्ताब ने दिया. अव्वलन हज़रत इदरीस ने सिला हुए लिबास पहना था. उस से क़ब्ल लोग चमड़े का लिबास ज़ेब-ए तन किया करते थे. जो बज़ात-ए ख़ुद हज़रत इदरीस ने अपने हाथों से सिले थे. पेशे के ऐतबार से हज़रत इदरीस ख़यात थे. पैमाइश के लिए तराज़ू भी अव्वलन आप ही ने ईजाद किया. अव्वलन कपड़ों को नापने के लिए बुसत अल शरीत को भी हज़रत इदरीस ने ईजाद किया.
हत्ता कि असलहा मसलन तलवार और चाक़ू को बनाना और इस्तमाल करना भी अव्वलन हज़रत इदरीस ही ने दुनया को सिखाया. आप निहायत ही हुस्न वाले थे. आपका क़द तवील था. आप ने अव्वलन कुफ़्र के ख़िलाफ़ अलम-ए जिहाद बुलंद किया. यानी सब से पहले जिहाद आप ही ने किया. अल्लाह तआला ने आप को अपनी उम्मत का हुक्मरान बनाया था. आप निहायत ही हुस्न वाले थे. आपका क़द तवील था. आप ने अव्वलन कुफ़्र के ख़िलाफ़ अलम-ए जिहाद बुलंद किया. यानी सब से पहले जिहाद आप ही ने किया.
अल्लाह तआ़ला ने आप को अपनी उम्मत का हुक्मरान बनाया था. हज़रत इदरीस की मलकुल मौत हज़रत इज़राइल से दोस्ती थी. आप फ़रिश्तों में मक़बूल थे. एक रोज़ हज़रत इदरीस ने मलाइका से कहा कि मैं अपनी आँखों से जहन्नुम का मुशाहदा करने का ख़्वाहां हूँ. लिहाज़ा फ़रिश्ता आप को जहन्नुम दिखाने ले गया. फिर आप ने फ़रिश्ते से कहा कि मैं जहन्नुम से गुज़रना चाहता हूँ. यानी जहन्नुम पर चलना चाहता हूँ . लिहाज़ा फिर आप जहन्नुम पर चले. फिर आप ने मलकुल मौत से फ़रमाया कि मैं चाहता हूँ कि तुम मेरी रूह क़ब्ज़ करो.
ताकि मैं मौत का ज़ायका चखूं. लिहाज़ा आप की रूह क़ब्ज़ की गयी. और फिर दोबारा आप में रूह फूंकी गयी. फिर हज़रत इदरीस ने हज़रत जिब्रईल से फ़रमाया कि मैं आसमानों से सफ़र करने का मुश्ताक़ हूँ. लिहाज़ा हज़रत इदरीस आसमानों का सफ़र करते हुए, बाब-ए जन्नत तक पहुंचे. तो आप ने हज़रत जिब्रील से फ़रमाया कि मैं जन्नत में चलना चाहता हूँ. लिहाज़ा आप जन्नत में दाख़िल हुए. फिर हज़रत जिब्रईल ने आप से अ़र्ज़ किया कि आप के ज़मीन पर लौट जाने का वक़्त आ गया है.
हज़रत इदरीस ने फ़रमाया कि अब मैं लौटना नहीं चाहता. हज़रत जिब्रईल ने अ़र्ज़ किया कि आप ज़िंदा हैं. आप यहां कैसे रह सकते हैं? हज़रत इदरीस ने जवाब दिया कि फ़रमान-ए इलाही के मुताबिक़ जन्नत में जाने से पहले मैं मौत का मज़ा चख चुका हूँ. और एक बार जन्नत में आ जाने के बाद दोबारा जन्नत से निकाला नहीं जाता. लिहाज़ा अब मैं बाहर नहीं जाऊँगा. लिहाज़ा हज़रत जिब्रील ने ये मामला अल्लाह तआ़ला से बयान किया. तो अल्लाह ने फ़रमाया कि उसे वहीं रहने दो.
लिहाज़ा हज़रत इदरीस को ज़िंदा ही आसमानों पर उठा लिए गए हैं. शब-ए मैराज में हज़रत इदरीस की मुलाक़ात हुज़ूर से चौथे आसमान पर हुई.
फ़िल-वक़्त आज की माअ़लूमात का हम यहीं इख़्तेताम करते हैं. सिलसिला-ए क़सस अल अन्बिया में हज़रत इदरीस علیہ السلام के हवादिस-ए ज़िन्दगी से मुतअ़्ल्लिक़, अव्वल ओ आख़िरी क़िस्त है लिहाज़ा क़िस्त-ए क़ादिम, हज़रत नूह़ علیہ السلام की ज़िन्दगी पर मुस्तअ़्मिल होगी. जिस की अशाअ़त अज़ जानिब मरदम-ए निज़ाम-ए आ़लम आज से 6 रोज़ बाअ़्द (तारीख़ 1/Jan/2023 की शब 20:00 बजे) होगी.
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