
A Man Wearing a Green Turban
हज़रत लूत अ़लैहिस्सलाम
दुरूद ओ सलाम हो तमाम मुअज़्ज़िज़ ज़ायरीन ओ क़ारईन पर अहले निज़ाम-ए आलम आप मुअज़्ज़िज़ीन को मुहब्बतों भरा अस्सलामु अलैकुम और तहे दिल से ख़ुश आमदीद कहते हैं मैं आपके साथ ज़ुलक़रनैन मुहम्मद सुलैमान और आप इस वक़्त मौजूद हैं निज़ाम-ए आलम पर -
आज का हमारा मौज़ू क़ौम- ए लूत पर अल्लाह का ख़ौफ़नाक अज़ाब पर मुसतमिल है इससे क़ब्ल ज़ायरीन ओ क़ारईन से गुज़ारिश है की पढ़ना शुरू करने से क़ब्ल एक-एक मर्तबा दरूद-ए इब्राहीम पढ़ लें, एक मर्तबा दुरूद-ए इब्राहीम पढ़ लेने से अल्लाह सुब्हानहु व तआला क़ारी (पढ़ने वाले) पर 10 मर्तबा रहमतें नाज़िल करता है-
بسم الله الرحمن الرحيم- - اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا صَلَّيْتَ عَلَى إِبْرَاهِيمَ وَعَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ،
- - اللَّهُمَّ بَارِكَ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ كَمَ ا بَارَكْتَ عَلَى إِبْرَاهِيمَ وَعَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ
दुरूद ओ सलाम बर ख़िताम अल अनबिया ओ मुरसलीन हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिहि वसल्लम व पयम्बर-ए खुदावंद-ए यकता जनाब-ए लूत नबी -
हज़रत लूत अ़लैहिस्सलाम कौन हैं?
आप हज़रत इब्राहिम अ़लैहिस्सलाम के भतीजे हैं, सबसे पहले आप ही ने हज़रत इब्राहिम अ़लैहिस्सलाम का साथ दिया और आप के साथ हिजरत की, एक मर्तबा रोमियों ने आप को क़ैद कर लिया तो हज़रत इब्राहीम अ़लैहिस्सलाम ने रोमियों से जिहाद करके आपको छुड़वाया, अल्लाह तआ़ला ने आपको (5) शहरों का नबी बनाया था, जिसमें सदूम, जराइमा, उ़मूद, अदवामा, ज़अ्राया यह पांच शहर उरदुन के इलाक़ा में आबाद थे, हर शहर में 1-1 लाख लोग असलहा से लैस रहते थे, अपनी ताक़त और ग़रूर में हमेंशा चूर रहते, गुनाहों पर जरी और दिलेर थे, बुतपरस्ती, क़त्ल ओ ग़ारत ग़री, बदफ़ेअ्ली, शराब पीना, मज़ामीन बजाना, फ़हश कलामी, मुसाफि़रों को परेशान करना, ग़र्ज़ कि दुनियां भर के बुरे कामों में मुबतला थे।
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उनकी बुराइयों को देखकर हजरत लूत अ़लैहिस्सलाम ने उनको बहुत कुछ समझाया अ़ज़ाब से डराया, लेकिन नाफ़रमानी पर तुले रहे, बल्कि निहायत बेबाकी से कहते कि ऐ लूत! तुम हमें अज़ाब से डराते हो, अगर तुम सच्चे हो तो हमारे लिएं अज़ाब ले आओ, जब आपके बार-बार समझाने से नहीं माने तो मजबूरन आपने अल्लाह तआ़ला की बारगाह में उनके हक़ में बद-दुआ फ़रमायी और अर्ज़ किया ऐ अल्लाह! मुझे और मेरे घर वालों को इनके शर से निजात अता फ़रमा। अल्लाह तआ़ला ने चन्द फ़रिश्तों को जवानों की शक़्ल में उनके पास भेजा,
उनमें हज़रत जिब्राईल अ़लैहिस्सलाम भी थे, यह फ़रिश्ते पहले हज़रत इब्राहिम अ़लैहिस्सलाम के यहां आये जैसा कि पहले हम लिख चुके हैं, कि उनमें हज़रत जिब्रीईल ने अपने आने का मक़सद बयान किया कि हम आपको हज़रत इस्ह़ाक की बशारत सुनाने आए हैं, और हज़रत लूत अ़लैहिस्सलाम के साथ उनके घर वालों को हिफ़ाज़त के साथ निकालने, और बाक़ी तमाम क़ौम की बस्तियों को उलटने और अ़ज़ाब में मुबतला करने आये हैं।चुनाचे जब यह फ़रिश्ते हज़रत लूत अ़लैहिस्सलाम की बस्ती सदूम पहुँचे तो हज़रत लूत घर पर नहीं थे
बल्कि अपनी खेती में मश्ग़ूल थे. जब बस्ती के लोगों ने उन नौजवानों को आपके घर के पास देखा तो दौड़ते हुए आये, इसी दरमियान हज़रत लूत भी मकान पर पहुँच गये, फ़रिश्तों से मुलाकात हुई । आपने देखा कि निहायत ख़ूबसूरत व अच्छी वजअ़ व क़त्अ़् के जवान हैं, लिहाज़ा अपनी क़ौम की बुरी आदतों का ख़ौफ़ हुआ, उनमें से हज़रत जिब्राईल ने बताया कि आप ख़ौफ़ न करें, यह तुम्हारी क़ौम हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती, हम फ़रिश्ते हैं, और उन पर अ़ज़ाब लेकर आये हैं। हज़रत लूत की बीवी चूँकि उसी क़ौम की थीं लिहाज़ा उस ने मुख़बरी कर के अपनी क़ौम को सारे हा़लात बता दिये,
लेकिन हज़रत लूत अब निहायत मुतमइन थे, इधर से जब बस्ती के लोगों ने भीड़ करके अन्दर घुसना चाहा तो हज़रत जिब्राईल ने अपना एक पर मारा जिससे तमाम लोगों के चेहरे बदल गये, आँखें ग़ायब हो गईं बल्कि पूरा चेहरा सपाट हो गया और सब लोग चीख़्ते चिल्लाते वहां से भागे और कहते जाते थे, लूत के यहां आज बड़े जादूगर आये हैं और उन्होने हम पर जादू कर दिया।
यह सब भाग गए तो हज़रत जिब्राईल अ़लैहिस्सलाम ने अर्ज़ किया , हम उन पर अ़ज़ाब करेंगे आप अपने घर वालों को लेकर रात ही में यहां से चले जायें। लेकिन अपनी बीवी को इत्तेला ना दें, कि वह भी अज़ाब में मुबतला होंगी कि उसने आपके साथ अदावत की है, और आप पीछे लौट कर ना देखें क्योंकि आप इस हाैलनाक अ़जाब को देख नहीं सकेंगे , लिहाज़ा आप कुछ रात ग़ुज़ार कर निकले, आप 14 लोग थे और घर का सामान साथ में था, चलते हुए हज़रत लूत अ़लैहिस्सलाम ने हज़रत जिब्राईल अ़लैहिस्सलाम से पूछा कि अ़ज़ाब कब आएगा?
उन्होंने कहा सुबह सवेरे उन पर अ़ज़ाब आने वाला है , जब हज़रत लूत अ़लैहिस्सलाम अपने साथियों के साथ बस्ती से दूर निकल गए और सुबह का उजाला फैला तो अल्लाह तआ़ला की तरफ़ से हज़रत जिब्राईल को हुक्म हुआ कि उन शहरों को उलट दो, लिहाज़ा हज़रत जिब्राईल अ़लैहिस्सलाम ने ऐसा ही किया हदीस शरीफ़ में है एक दिन हज़रत जिब्राईल अ़लैहिस्सलाम से हमारे नबी ने फ़रमाया है, ऐ जिब्राईल! तुम अपनी ताक़त का अंदाज़ा बयान करो, तो हज़रत जिब्राईल अ़लैहिस्सलाम ने अर्ज़ किया
हुजू़र जब मुझे हज़रत हूद अ़लैहिस्सलाम की क़ौम पर अ़ज़ाब करने के लिए भेजा गया तो मैंने उनकी बस्तियों को ज़मीन के बिल्कुल नीचे वाले हिस्से से उठाया और वह शहर इतने बड़े थे कि उनमें से एक शहर "सदूम" इतना बड़ा था कि इसकी आबादी ( 4 लाख) थी, मैने उन तमाम शहरों को अपने एक पर पर उठाकर आसमान के इतने क़रीब ले गया कि उन शहरों की मुरग़ियों और कुत्तों की आवाज़ आसमान पर सुनी जा रही थी,
फि़र मैंने उन तमाम शहरों को उसी तरहं उलट दिया, लेकिन मुझे कोई बोझ महसूस नहीं हुआ इससे पहले कि उनकी बस्तियों को उल्टा जाता हर काफ़िर पर एक-एक पत्थर भी आसमान से गिराया गया जो बड़े-बड़े मटकों के बराबर थे और वह उनके जिस्म में घुसते चले गए, जिसकी वजह से उन पर आज भी आलमें बरज़ख़ में अ़ज़ाब हो रहा है और क़यामत तक होता रहेगा ।यहां तक कि क़यामत के दिन भी उनको उल्टा करके दोजख़ में डाला जाएगा, उनके शहरों को जिस जगह पर उल्टा गया तो इस जगह आज भी समन्दर है
और इस जगह के पानी में ऐसी तासीर पायी जाती है कि जो भी मछली या कोई भी जानवर इस पानी में चला जाता है तो फ़ौरन मर जाता है, इसलिए इसको (मौत का समन्दर) कहा जाता है! इस वाक़्य के वक़्त हज़रत लूत अ़लैहिस्सलाम शहर ज़अ़्रार पहुंच गए थे, इसके बाद आप यहां से निकलकर हज़रत इब्राहीम अ़लैहिस्सलाम के पास आए, और (60 बरस) तक ज़िन्दा रहे, आपका रौज़ा मुबारक हज़रत इब्राहिम अ़लैहिस्सलाम के रौज़े के क़रीब है।
मसअला: नाज़रीन अल्लाह तआ़ला ने क़ौमें लूत पर तो अ़ज़ाब भेजा यह तो आपने सुन लिया, लेकिन क़ौमें लूत वाला अमल आज भी दुनियां में पाया जाता है जिसे आप और हम हमजिंस परस्ती के नाम से जानते हैं लिहाज़ा अगर आपमें से कोई शख़्स ऐसा करता है, तो फ़ौरन अल्लाह की बारगाह में तौबा करें बल्कि कोई आपका दोस्त भी ऐसा घिनौंना काम करे तो उससे आज ही से याराना ख़त्म कर दें क्योकि हज़रत लूत अ़लैहिस्सलाम की बीवी भी इस अ़ज़ाब में इसलियें मुबतला हो गईं, कि उन्होने ऐसे लोगों के साथ रहनुमाई करी जबकि वह ख़ुद यह खब्बीस अमल नहीं करती थीं तो सोंचे आपका क्या हश्र होगा बल्कि हदीस शरीफ़ में इस खब्बीस काम के बारे में जो अ़ज़ाब बताये गये हैं उनको ब्यान करने से भी मेरी रूंह कांप जाती है।
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